Thursday, January 8, 2009

maine likh kar shabd apne

मैंने लिख कर शब्द अपने
कुछ
बहते पानी के धारों में डाले
कुछ ज़ब्त किये
कुछ दफन किये
कुछ
जलते अंगारों पर डाले

वो नमक बने
कुछ सागर का
वो फूल बने
इक पतझड़ का
कहीं धुआं उठा कोई बदल सा
वो गीत बने
इक पागल का

मैंने लिख कर शब्द अपने
कुछ बहते पानी के धारों में डाले
कुछ फाड़े
कुछ फ़ेंक दिए
कुछ उडती हवा के शानो पर डाले

वो खाब बने
इक सुबहो का
हो दर्द पुराना
भूला सा
टूटा
कोई तार किसी के आँचल का
लो फिर इक बार बनें वो
अरमान
मेरे दिल पागल का

मैंने लिख कर शब्द अपने...

सब, वो सब के सब delete कर डाले ;)

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